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"दो से दुनिया-एक किताब"

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1) मोर गाँव के गोरी तैं .... तोला अब्बड़ मया करथंव, दिन-रात रानी तोर, सपना ला मैं हँ देखत रहिथँव...! ( 2 ) अरे शहर भीतर म घुमाहूँ तोला अउ मन के बात बताहूँ तोला , अगोर लेबे अवईय्या अक्ती ल उही सीजन म अपन बनाहूँ तोला ! ( 3 ) बजार के पताल कस गाल तोरे लाल-लाल रंग-बिरंगी बदन तोर बताना तोर हाल- चाल ( 4 ) गोरी "आई ल बीयू" कहे बर  तोला काबर अतेक सरम लगथे ,  एक बार कहिके तो देख पता चलही कतेक मीठ परेम लगथे ! ( 5 ) कईसे तोला बतांव गोरी मया का चीज होथे, जेला नई होवय वो ह जिनगी भर रोथे...! ( 6 ) बस-बस होगे अउ कतक खवाबे मया के लाडू मया के दुसमन ये दुनिया ला घिच के लगादे झाड़ू ...! ( 7 ) स्वीट-स्वीट तोर गोठ गोरी दिल ल "झटका" देथे ओ, मया के बीच मजधार म मोला "अटका" देथे  ओ ! ( 8 ) खे-खे,खे-खे झन हांस गोरी दांत-कान ह निकल जाही ओ , तब, तोर चेहरा के देखईय्या ल अब्बड़ मजा आही ओ ! ( 9 ) साढ़े चार बजे आबे अमरईय्या म मोर छुट्टी चार बजे होथे ओ , तोर-मोर जोड़ी रानी "सीता-राम" कस जचथे ओ ! ( 10 ) बिहा म नाचत हे टुरी हाई साउंड के बाजा मा जइसे कोई नाचे नहीं "छालीवुड" के ...

*गुलज़ार ने कितनी खूबसूरती से बता दिया जिंदगी क्या है!*

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-कभी तानों में कटेगी,  कभी तारीफों में; ये जिंदगी है यारों,  पल पल घटेगी !! -पाने को कुछ नहीं,  ले जाने को कुछ नहीं; फिर भी क्यों चिंता करते हो, इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी, ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी ! -बार बार रफू करता रहता हूँ, ...जिन्दगी की जेब !! कम्बखत फिर भी,  निकल जाते हैं..., खुशियों के कुछ लम्हें !! -ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही... ख़्वाहिशों का है !! ना तो किसी को गम चाहिए, ना ही किसी को कम चाहिए !! -खटखटाते रहिए दरवाजा..., एक दूसरे के मन का; मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिए !! -उड़ जाएंगे एक दिन ..., तस्वीर से रंगों की तरह ! हम वक्त की टहनी पर..., बेठे हैं परिंदों की तरह !! -बोली बता देती है,इंसान कैसा है! बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है! घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है ! संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !! -ना राज़* है... "ज़िन्दगी", ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी"; बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी! -जीवन की किताबों पर, बेशक नया कवर चढ़ाइये; पर...बिखरे पन्नों को, पहले प्यार से चिपकाइये !!