आदमी जब *पत्तल* में खाना खाता था
आदमी जब *पत्तल* में खाना खाता था, मेहमान को देख के वह *हरा* हो जाता था, स्वागत में पूरा परिवार बिछ जाता था.... बाद में जब वह *मिट्टी के बर्तन* में खाने लगा, रिश्तों को *जमीन से जुड़कर* निभाने लगा.. फिर जब *पीतल के बर्तन* उपयोग में लेता था, रिश्तों को *साल छः महीने* में चमका लेता था... लेकिन बर्तन *कांच* के जब से बरतने लगे, एक *हल्की* सी चोट में रिश्ते बिखरने लगे ... अब *बर्तन*, थर्मोकोल पेपर के इस्तेमाल होने लगे, सारे *सम्बन्ध* भी अब *यूज़ एंड थ्रो* होने लगे ... 🙏✍✍अर्जुन भास्कर ✍✍🙏