कविता : देश के नाम यह कविता लिख रहा हूँ


लेखक: अर्जुन भास्कर 
नमन देश के वीरो को!💐

देश के नाम यह कविता लिख रहा हूँ
  गाथा इसकी पल पल गुनगुना रहा हूँ।
कभी उथल पुथल इसकी तस्वीर होती
  पर इसकी मर्यादा का गीत लिख रहा हूँ।।

कभी कल कल बहते सरिताओं में
  खुद को यूं लहराता देखने लगता हूँ।
कभी हिमाचल की ऊंची चोटी देख
  हवाओं से बेफ़िज़ूल इतराने लगता हूँ।।

देश के नाम यह कविता लिख रहा हूँ
  गाथा इसकी पल पल गुनगुना रहा हूँ।
चाँद अब यूं चंद पलो का सफर हैं
  कि भारत की कामयबी बयां कर रहा हूँ।।

नील आकाश से समंदर तक झांक लो
  सारे जहाँ से अच्छा हर पत्तो से सुन रहा हूँ।
क्यों नफ़रतों की रुमाइश रखते हो दिलो में
  जी हाँ, मैं पुलवामा की ही बात कर रहा हूँ।।

देश के नाम यह कविता लिख रहा हूँ
  गाथा इसकी पल पल गुनगुना रहा हूँ।
क्यों आते हैं विनाश हमारे इस तहज़ीब में
  इन्ही सवालों को आज भटकते देख रहा हूँ।।

बिलखते मासूमो को रोते सुन रहा हूँ
  ग़रीबो की झुग्गियाँ ढहते नालो में पा रहा हूँ।
अखंड भारत का ख़्वाब अधूरा लग रहा हैं
  कि मेरा भारत आज सुना सुना लग रहा हैं।।
  
देश के नाम यह कविता लिख रहा हूँ
  गाथा इसकी पल पल गुनगुना रहा हूँ।
लेकिन अनेकता में एकता का यह हीरा हैं
  अपने हिंदुस्तान को पल पल बढ़ते देख रहा हूँ।।

कि......देश के नाम यह कविता लिख रहा हूँ!

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