**नौकरी**

बड़ी हसीन होगी तू नौकरी
 सारे युवा आज तुम पर ही मरते हैं
 सुखचैन खोकर चटाई पर सोकर 
सारी रात जागकर पन्ने पलटते हैं
 दिन में तैयारी और रात को मैगी 
आधे पेटी खाकर तेरा नाम जपते हैं
 सारे युवा आज तुझ पर ही मरते हैं 
अनजान शहर में छोटा सस्ता रूम लेकर 
किचन बैडरूम सब उसी में सहेज कर
 चाहत में तेरी अपने मां बाप और 
दोस्ती से दूर रहते हैं 
सारे युवा आज तुझ पर ही मरते हैं
 राशन की गठरी सिर पर उठाए 
अपनी मायूसी और मजबूरियां खुद ही 
छुपाए खचाखच भरी ट्रेन में बिना
 टिकट के रिस्क लेते आज सफर करते हैं
 सारे युवा आज तुझ पर ही मरते हैं
 इंटरनेट अखबारों में तुझक तलाशते हैं 
तेरे लिए पत्र पत्रिकाएं पढ़ते-पढ़ते 
32 साल तक के जवान कुंवारे फिरते हैं
 तू कितनी हसीन है यह नौकरी
 सारे युवा आज तुम पर ही मरते हैं   

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